आदेश और निषेध
وَاسْتَع۪ينُوا بِالصَّبْرِ وَالصَّلٰوةِۜ وَاِنَّهَا لَكَب۪يرَةٌ اِلَّا عَلَى الْخَاشِع۪ينَۙ
धैर्य और नमाज़ से मदद लो, और निस्संदेह यह (नमाज) बहुत कठिन है, किन्तु उन लोगों के लिए नहीं जिनके दिल पिघले हुए हो;
وَلِكُلٍّ وِجْهَةٌ هُوَ مُوَلّ۪يهَا فَاسْتَبِقُوا الْخَيْرَاتِۜ اَيْنَ مَا تَكُونُوا يَاْتِ بِكُمُ اللّٰهُ جَم۪يعًاۜ اِنَّ اللّٰهَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ
प्रत्येक की एक ही दिशा है, वह उसी की ओर मुख किेए हुए है, तो तुम भलाईयों में अग्रसरता दिखाओ। जहाँ कहीं भी तुम होगे अल्लाह तुम सबको एकत्र करेगा। निस्संदेह अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
وَمِنْ حَيْثُ خَرَجْتَ فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِۜ وَحَيْثُ مَا كُنْتُمْ فَوَلُّوا وُجُوهَكُمْ شَطْرَهُۙ لِئَلَّا يَكُونَ لِلنَّاسِ عَلَيْكُمْ حُجَّةٌۗ اِلَّا الَّذ۪ينَ ظَلَمُوا مِنْهُمْ فَلَا تَخْشَوْهُمْ وَاخْشَوْن۪ي وَلِاُتِمَّ نِعْمَت۪ي عَلَيْكُمْ وَلَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَۙ
जहाँ से भी तुम निकलो, 'मस्जिदे हराम' की ओर अपना मुँह फेर लिया करो, और जहाँ कहीं भी तुम हो उसी की ओर मुँह कर लिया करो, ताकि लोगों के पास तुम्हारे ख़िलाफ़ कोई हुज्जत बाक़ी न रहे - सिवाय उन लोगों के जो उनमें ज़ालिम हैं, तुम उनसे न डरो, मुझसे ही डरो - और ताकि मैं तुमपर अपनी नेमत पूरी कर दूँ, और ताकि तुम सीधी राह चलो
يَٓا اَيُّهَا النَّاسُ كُلُوا مِمَّا فِي الْاَرْضِ حَلَالًا طَيِّبًاۘ وَلَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِۜ اِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُب۪ينٌ
ऐ लोगों! धरती में जो हलाल और अच्छी-सुथरी चीज़ें हैं उन्हें खाओ और शैतान के पदचिन्हों पर न चलो। निस्संदेह वह तुम्हारा खुला शत्रु है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا كُتِبَ عَلَيْكُمُ الْقِصَاصُ فِي الْقَتْلٰىۜ اَلْحُرُّ بِالْحُرِّ وَالْعَبْدُ بِالْعَبْدِ وَالْاُنْثٰى بِالْاُنْثٰىۜ فَمَنْ عُفِيَ لَهُ مِنْ اَخ۪يهِ شَيْءٌ فَاتِّبَاعٌ بِالْمَعْرُوفِ وَاَدَٓاءٌ اِلَيْهِ بِاِحْسَانٍۜ ذٰلِكَ تَخْف۪يفٌ مِنْ رَبِّكُمْ وَرَحْمَةٌۜ فَمَنِ اعْتَدٰى بَعْدَ ذٰلِكَ فَلَهُ عَذَابٌ اَل۪يمٌ
ऐ ईमान लानेवालो! मारे जानेवालों के विषय में हत्यादंड (क़िसास) तुमपर अनिवार्य किया गया, स्वतंत्र-स्वतंत्र बराबर है और ग़़ुलाम-ग़ुलाम बराबर है और औरत-औरत बराबर है। फिर यदि किसी को उसके भाई की ओर से कुछ छूट मिल जाए तो सामान्य रीति का पालन करना चाहिए; और भले तरीके से उसे अदा करना चाहिए। यह तुम्हारें रब की ओर से एक छूट और दयालुता है। फिर इसके बाद भो जो ज़्यादती करे तो उसके लिए दुखद यातना है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا كُتِبَ عَلَيْكُمُ الصِّيَامُ كَمَا كُتِبَ عَلَى الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِكُمْ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَۙ
ऐ ईमान लानेवालो! तुमपर रोज़े अनिवार्य किए गए, जिस प्रकार तुमसे पहले के लोगों पर किए गए थे, ताकि तुम डर रखनेवाले बन जाओ
اُحِلَّ لَكُمْ لَيْلَةَ الصِّيَامِ الرَّفَثُ اِلٰى نِسَٓائِكُمْۜ هُنَّ لِبَاسٌ لَكُمْ وَاَنْتُمْ لِبَاسٌ لَهُنَّۜ عَلِمَ اللّٰهُ اَنَّكُمْ كُنْتُمْ تَخْتَانُونَ اَنْفُسَكُمْ فَتَابَ عَلَيْكُمْ وَعَفَا عَنْكُمْۚ فَالْـٰٔنَ بَاشِرُوهُنَّ وَابْتَغُوا مَا كَتَبَ اللّٰهُ لَكُمْۖ وَكُلُوا وَاشْرَبُوا حَتّٰى يَتَبَيَّنَ لَكُمُ الْخَيْطُ الْاَبْيَضُ مِنَ الْخَيْطِ الْاَسْوَدِ مِنَ الْفَجْرِۖ ثُمَّ اَتِمُّوا الصِّيَامَ اِلَى الَّيْلِۚ وَلَا تُبَاشِرُوهُنَّ وَاَنْتُمْ عَاكِفُونَۙ فِي الْمَسَاجِدِۜ تِلْكَ حُدُودُ اللّٰهِ فَلَا تَقْرَبُوهَاۜ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللّٰهُ اٰيَاتِه۪ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ
तुम्हारे लिए रोज़ो की रातों में अपनी औरतों के पास जाना जायज़ (वैध) हुआ। वे तुम्हारे परिधान (लिबास) हैं और तुम उनका परिधान हो। अल्लाह को मालूम हो गया कि तुम लोग अपने-आपसे कपट कर रहे थे, तो उसने तुमपर कृपा की और तुम्हें क्षमा कर दिया। तो अब तुम उनसे मिलो-जुलो और अल्लाह ने जो कुछ तुम्हारे लिए लिख रखा है, उसे तलब करो। और खाओ और पियो यहाँ तक कि तुम्हें उषाकाल की सफ़ेद धारी (रात की) काली धारी से स्पष्टा दिखाई दे जाए। फिर रात तक रोज़ा पूरा करो और जब तुम मस्जिदों में 'एतकाफ़' की हालत में हो, तो तुम उनसे न मिलो। ये अल्लाह की सीमाएँ हैं। अतः इनके निकट न जाना। इस प्रकार अल्लाह अपनी आयतें लोगों के लिए खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि वे डर रखनेवाले बनें
وَلَا تَاْكُلُٓوا اَمْوَالَكُمْ بَيْنَكُمْ بِالْبَاطِلِ وَتُدْلُوا بِهَٓا اِلَى الْحُكَّامِ لِتَاْكُلُوا فَر۪يقًا مِنْ اَمْوَالِ النَّاسِ بِالْاِثْمِ وَاَنْتُمْ تَعْلَمُونَ۟
और आपस में तुम एक-दूसरे के माल को अवैध रूप से न खाओ, और न उन्हें हाकिमों के आगे ले जाओ कि (हक़ मारकर) लोगों के कुछ माल जानते-बूझते हड़प सको
وَقَاتِلُوا ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِ الَّذ۪ينَ يُقَاتِلُونَكُمْ وَلَا تَعْتَدُواۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يُحِبُّ الْمُعْتَد۪ينَ
और अल्लाह के मार्ग में उन लोगों से लड़ो जो तुमसे लड़े, किन्तु ज़्यादती न करो। निस्संदेह अल्लाह ज़्यादती करनेवालों को पसन्द नहीं करता
وَاَنْفِقُوا ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِ وَلَا تُلْقُوا بِاَيْد۪يكُمْ اِلَى التَّهْلُكَةِۚۛ وَاَحْسِنُواۚۛ اِنَّ اللّٰهَ يُحِبُّ الْمُحْسِن۪ينَ
और अल्लाह के मार्ग में ख़र्च करो और अपने ही हाथों से अपने-आपकोतबाही में न डालो, और अच्छे से अच्छा तरीक़ा अपनाओ। निस्संदेह अल्लाह अच्छे से अच्छा काम करनेवालों को पसन्द करता है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا ادْخُلُوا فِي السِّلْمِ كَٓافَّةًۖ وَلَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِۜ اِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُب۪ينٌ
ऐ ईमान लानेवालो! तुम सब इस्लाम में दाख़िल हो जाओ और शैतान के पदचिन्ह पर न चलो। वह तो तुम्हारा खुला हुआ शत्रु है
وَلَا تَنْكِحُوا الْمُشْرِكَاتِ حَتّٰى يُؤْمِنَّۜ وَلَاَمَةٌ مُؤْمِنَةٌ خَيْرٌ مِنْ مُشْرِكَةٍ وَلَوْ اَعْجَبَتْكُمْۚ وَلَا تُنْكِحُوا الْمُشْرِك۪ينَ حَتّٰى يُؤْمِنُواۜ وَلَعَبْدٌ مُؤْمِنٌ خَيْرٌ مِنْ مُشْرِكٍ وَلَوْ اَعْجَبَكُمْۜ اُو۬لٰٓئِكَ يَدْعُونَ اِلَى النَّارِۚ وَاللّٰهُ يَدْعُٓوا اِلَى الْجَنَّةِ وَالْمَغْفِرَةِ بِاِذْنِه۪ۚ وَيُبَيِّنُ اٰيَاتِه۪ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ۟
और मुशरिक (बहुदेववादी) स्त्रियों से विवाह न करो जब तक कि वे ईमान न लाएँ। एक ईमानदारी बांदी (दासी), मुशरिक स्त्री से कहीं उत्तम है; चाहे वह तुम्हें कितनी ही अच्छी क्यों न लगे। और न (ईमानवाली स्त्रियाँ) मुशरिक पुरुषों से विवाह करो, जब तक कि वे ईमान न लाएँ। एक ईमानवाला गुलाम आज़ाद मुशरिक से कहीं उत्तम है, चाहे वह तुम्हें कितना ही अच्छा क्यों न लगे। ऐसे लोग आग (जहन्नम) की ओर बुलाते है और अल्लाह अपनी अनुज्ञा से जन्नत और क्षमा की ओर बुलाता है। और वह अपनी आयतें लोगों के सामने खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि वे चेतें
وَيَسْـَٔلُونَكَ عَنِ الْمَح۪يضِۜ قُلْ هُوَ اَذًىۙ فَاعْتَزِلُوا النِّسَٓاءَ فِي الْمَح۪يضِۙ وَلَا تَقْرَبُوهُنَّ حَتّٰى يَطْهُرْنَۚ فَاِذَا تَطَهَّرْنَ فَاْتُوهُنَّ مِنْ حَيْثُ اَمَرَكُمُ اللّٰهُۜ اِنَّ اللّٰهَ يُحِبُّ التَّوَّاب۪ينَ وَيُحِبُّ الْمُتَطَهِّر۪ينَ
और वे तुमसे मासिक-धर्म के विषय में पूछते है। कहो, "वह एक तकलीफ़ और गन्दगी की चीज़ है। अतः मासिक-धर्म के दिनों में स्त्रियों से अलग रहो और उनके पास न जाओ, जबतक कि वे पाक-साफ़ न हो जाएँ। फिर जब वे भली-भाँति पाक-साफ़ हो जाए, तो जिस प्रकार अल्लाह ने तुम्हें बताया है, उनके पास आओ। निस्संदेह अल्लाह बहुत तौबा करनेवालों को पसन्द करता है और वह उन्हें पसन्द करता है जो स्वच्छता को पसन्द करते है
وَلَا تَجْعَلُوا اللّٰهَ عُرْضَةً لِاَيْمَانِكُمْ اَنْ تَبَرُّوا وَتَتَّقُوا وَتُصْلِحُوا بَيْنَ النَّاسِۜ وَاللّٰهُ سَم۪يعٌ عَل۪يمٌ
अपने नेक और धर्मपरायण होने और लोगों के मध्य सुधारक होने के सिलसिले में अपनी क़समों के द्वारा अल्लाह को आड़ और निशाना न बनाओ कि इन कामों को छोड़ दो। अल्लाह सब कुछ सुनता, जानता है
حَافِظُوا عَلَى الصَّلَوَاتِ وَالصَّلٰوةِ الْوُسْطٰى وَقُومُوا لِلّٰهِ قَانِت۪ينَ
सदैव नमाज़ो की और अच्छी नमाज़ों की पाबन्दी करो, और अल्लाह के आगे पूरे विनीत और शान्तभाव से खड़े हुआ करो
لَٓا اِكْرَاهَ فِي الدّ۪ينِ قَدْ تَبَيَّنَ الرُّشْدُ مِنَ الْغَيِّۚ فَمَنْ يَكْفُرْ بِالطَّاغُوتِ وَيُؤْمِنْ بِاللّٰهِ فَقَدِ اسْتَمْسَكَ بِالْعُرْوَةِ الْوُثْقٰىۗ لَا انْفِصَامَ لَهَاۜ وَاللّٰهُ سَم۪يعٌ عَل۪يمٌ
धर्म के विषय में कोई ज़बरदस्ती नहीं। सही बात नासमझी की बात से अलग होकर स्पष्ट हो गई है। तो अब जो कोई बढ़े हुए सरकश को ठुकरा दे और अल्लाह पर ईमान लाए, उसने ऐसा मज़बूत सहारा थाम लिया जो कभी टूटनेवाला नहीं। अल्लाह सब कुछ सुनने, जाननेवाला है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تُبْطِلُوا صَدَقَاتِكُمْ بِالْمَنِّ وَالْاَذٰىۙ كَالَّذ۪ي يُنْفِقُ مَالَهُ رِئَٓاءَ النَّاسِ وَلَا يُؤْمِنُ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِۜ فَمَثَلُهُ كَمَثَلِ صَفْوَانٍ عَلَيْهِ تُرَابٌ فَاَصَابَهُ وَابِلٌ فَتَرَكَهُ صَلْدًاۜ لَا يَقْدِرُونَ عَلٰى شَيْءٍ مِمَّا كَسَبُواۜ وَاللّٰهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْكَافِر۪ينَ
ऐ ईमानवालो! अपने सदक़ो को एहसान जताकर और दुख देकर उस व्यक्ति की तरह नष्ट न करो जो लोगों को दिखाने के लिए अपना माल ख़र्च करता है और अल्लाह और अंतिम दिन पर ईमान नहीं रखता। तो उसकी हालत उस चट्टान जैसी है जिसपर कुछ मिट्टी पड़ी हुई थी, फिर उस पर ज़ोर की वर्षा हुई और उसे साफ़ चट्टान की दशा में छोड़ गई। ऐसे लोग अपनी कमाई कुछ भी प्राप्त नहीं करते। और अल्लाह इनकार की नीति अपनानेवालों को मार्ग नहीं दिखाता
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اَنْفِقُوا مِنْ طَيِّبَاتِ مَا كَسَبْتُمْ وَمِمَّٓا اَخْرَجْنَا لَكُمْ مِنَ الْاَرْضِۖ وَلَا تَيَمَّمُوا الْخَب۪يثَ مِنْهُ تُنْفِقُونَ وَلَسْتُمْ بِاٰخِذ۪يهِ اِلَّٓا اَنْ تُغْمِضُوا ف۪يهِۜ وَاعْلَمُٓوا اَنَّ اللّٰهَ غَنِيٌّ حَم۪يدٌ
ऐ ईमान लानेवालो! अपनी कमाई को पाक और अच्छी चीज़ों में से ख़र्च करो और उन चीज़ों में से भी जो हमने धरती से तुम्हारे लिए निकाली है। और देने के लिए उसके ख़राब हिस्से (के देने) का इरादा न करो, जबकि तुम स्वयं उसे कभी न लोगे। यह और बात है कि उसको लेने में देखी-अनदेखी कर जाओ। और जान लो कि अल्लाह निस्पृह, प्रशंसनीय है
اَلَّذ۪ينَ يَاْكُلُونَ الرِّبٰوا لَا يَقُومُونَ اِلَّا كَمَا يَقُومُ الَّذ۪ي يَتَخَبَّطُهُ الشَّيْطَانُ مِنَ الْمَسِّۜ ذٰلِكَ بِاَنَّهُمْ قَالُٓوا اِنَّمَا الْبَيْعُ مِثْلُ الرِّبٰواۢ وَاَحَلَّ اللّٰهُ الْبَيْعَ وَحَرَّمَ الرِّبٰواۜ فَمَنْ جَٓاءَهُ مَوْعِظَةٌ مِنْ رَبِّه۪ فَانْتَهٰى فَلَهُ مَا سَلَفَۜ وَاَمْرُهُٓ اِلَى اللّٰهِۜ وَمَنْ عَادَ فَاُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ النَّارِۚ هُمْ ف۪يهَا خَالِدُونَ
और लोग ब्याज खाते है, वे बस इस प्रकार उठते है जिस प्रकार वह क्यक्ति उठता है जिसे शैतान ने छूकर बावला कर दिया हो और यह इसलिए कि उनका कहना है, "व्यापार भी तो ब्याज के सदृश है," जबकि अल्लाह ने व्यापार को वैध और ब्याज को अवैध ठहराया है। अतः जिसको उसके रब की ओर से नसीहत पहुँची और वह बाज़ आ गया, तो जो कुछ पहले ले चुका वह उसी का रहा और मामला उसका अल्लाह के हवाले है। और जिसने फिर यही कर्म किया तो ऐसे ही लोग आग (जहन्नम) में पड़नेवाले है। उसमें वे सदैव रहेंगे
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اِذَا تَدَايَنْتُمْ بِدَيْنٍ اِلٰٓى اَجَلٍ مُسَمًّى فَاكْتُبُوهُۜ وَلْيَكْتُبْ بَيْنَكُمْ كَاتِبٌ بِالْعَدْلِۖ وَلَا يَاْبَ كَاتِبٌ اَنْ يَكْتُبَ كَمَا عَلَّمَهُ اللّٰهُ فَلْيَكْتُبْۚ وَلْيُمْلِلِ الَّذ۪ي عَلَيْهِ الْحَقُّ وَلْيَتَّقِ اللّٰهَ رَبَّهُ وَلَا يَبْخَسْ مِنْهُ شَيْـًٔاۜ فَاِنْ كَانَ الَّذ۪ي عَلَيْهِ الْحَقُّ سَف۪يهًا اَوْ ضَع۪يفًا اَوْ لَا يَسْتَط۪يعُ اَنْ يُمِلَّ هُوَ فَلْيُمْلِلْ وَلِيُّهُ بِالْعَدْلِۜ وَاسْتَشْهِدُوا شَه۪يدَيْنِ مِنْ رِجَالِكُمْۚ فَاِنْ لَمْ يَكُونَا رَجُلَيْنِ فَرَجُلٌ وَامْرَاَتَانِ مِمَّنْ تَرْضَوْنَ مِنَ الشُّهَدَٓاءِ اَنْ تَضِلَّ اِحْدٰيهُمَا فَتُذَكِّرَ اِحْدٰيهُمَا الْاُخْرٰىۜ وَلَا يَاْبَ الشُّهَدَٓاءُ اِذَا مَا دُعُواۜ وَلَا تَسْـَٔمُٓوا اَنْ تَكْتُبُوهُ صَغ۪يرًا اَوْ كَب۪يرًا اِلٰٓى اَجَلِه۪ۜ ذٰلِكُمْ اَقْسَطُ عِنْدَ اللّٰهِ وَاَقْوَمُ لِلشَّهَادَةِ وَاَدْنٰٓى اَلَّا تَرْتَابُٓوا اِلَّٓا اَنْ تَكُونَ تِجَارَةً حَاضِرَةً تُد۪يرُونَهَا بَيْنَكُمْ فَلَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ اَلَّا تَكْتُبُوهَاۜ وَاَشْهِدُٓوا اِذَا تَبَايَعْتُمْۖ وَلَا يُضَٓارَّ كَاتِبٌ وَلَا شَه۪يدٌۜ وَاِنْ تَفْعَلُوا فَاِنَّهُ فُسُوقٌ بِكُمْۜ وَاتَّقُوا اللّٰهَۜ وَيُعَلِّمُكُمُ اللّٰهُۜ وَاللّٰهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَل۪يمٌ
ऐ ईमान लानेवालो! जब किसी निश्चित अवधि के लिए आपस में ऋण का लेन-देन करो तो उसे लिख लिया करो और चाहिए कि कोई लिखनेवाला तुम्हारे बीच न्यायपूर्वक (दस्तावेज़) लिख दे। और लिखनेवाला लिखने से इनकार न करे; जिस प्रकार अल्लाह ने उसे सिखाया है, उसी प्रकार वह दूसरों के लिए लिखने के काम आए और बोलकर वह लिखाए जिसके ज़िम्मे हक़ की अदायगी हो। और उसे अल्लाह का, जो उसका रब है, डर रखना चाहिए और उसमें कोई कमी न करनी चाहिए। फिर यदि वह व्यक्ति जिसके ज़िम्मे हक़ की अदायगी हो, कम समझ या कमज़ोर हो या वह बोलकर न लिखा सकता हो तो उसके संरक्षक को चाहिए कि न्यायपूर्वक बोलकर लिखा दे। और अपने पुरुषों में से दो गवाहो को गवाह बना लो और यदि दो पुरुष न हों तो एक पुरुष और दो स्त्रियाँ, जिन्हें तुम गवाह के लिए पसन्द करो, गवाह हो जाएँ (दो स्त्रियाँ इसलिए रखी गई है) ताकि यदि एक भूल जाए तो दूसरी उसे याद दिला दे। और गवाहों को जब बुलाया जाए तो आने से इनकार न करें। मामला चाहे छोटा हो या बड़ा एक निर्धारित अवधि तक के लिए है, तो उसे लिखने में सुस्ती से काम न लो। यह अल्लाह की स्पष्ट से अधिक न्यायसंगत बात है और इससे गवाही भी अधिक ठीक रहती है। और इससे अधि क संभावना है कि तुम किसी संदेह में नहीं पड़ोगे। हाँ, यदि कोई सौदा नक़द हो, जिसका लेन-देन तुम आपस में कर रहे हो, तो तुम्हारे उसके न लिखने में तुम्हारे लिए कोई दोष नहीं। और जब आपम में क्रय-विक्रय का मामला करो तो उस समय भी गवाह कर लिया करो, और न किसी लिखनेवाले को हानि पहुँचाए जाए और न किसी गवाह को। और यदि ऐसा करोगे तो यह तुम्हारे लिए अवज्ञा की बात होगी। और अल्लाह का डर रखो। अल्लाह तुम्हें शिक्षा दे रहा है। और अल्लाह हर चीज़ को जानता है
وَاِنْ كُنْتُمْ عَلٰى سَفَرٍ وَلَمْ تَجِدُوا كَاتِبًا فَرِهَانٌ مَقْبُوضَةٌۜ فَاِنْ اَمِنَ بَعْضُكُمْ بَعْضًا فَلْيُؤَدِّ الَّذِي اؤْتُمِنَ اَمَانَتَهُ وَلْيَتَّقِ اللّٰهَ رَبَّهُۜ وَلَا تَكْتُمُوا الشَّهَادَةَۜ وَمَنْ يَكْتُمْهَا فَاِنَّهُٓ اٰثِمٌ قَلْبُهُۜ وَاللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُونَ عَل۪يمٌ۟
और यदि तुम किसी सफ़र में हो और किसी लिखनेवाले को न पा सको, तो गिरवी रखकर मामला करो। फिर यदि तुममें से एक-दूसरे पर भरोसा के, तो जिस पर भरोसा किया है उसे चाहिए कि वह यह सच कर दिखाए कि वह विश्वासपात्र है और अल्लाह का, जो उसका रब है, डर रखे। और गवाही को न छिपाओ। जो उसे छिपाता है तो निश्चय ही उसका दिल गुनाहगार है, और तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है
لَا يَتَّخِذِ الْمُؤْمِنُونَ الْكَافِر۪ينَ اَوْلِيَٓاءَ مِنْ دُونِ الْمُؤْمِن۪ينَۚ وَمَنْ يَفْعَلْ ذٰلِكَ فَلَيْسَ مِنَ اللّٰهِ ف۪ي شَيْءٍ اِلَّٓا اَنْ تَتَّقُوا مِنْهُمْ تُقٰيةًۜ وَيُحَذِّرُكُمُ اللّٰهُ نَفْسَهُۜ وَاِلَى اللّٰهِ الْمَص۪يرُ
ईमानवालों को चाहिए कि वे ईमानवालों से हटकर इनकारवालों को अपना मित्र (राज़दार) न बनाएँ, और जो ऐसा करेगा, उसका अल्लाह से कोई सम्बन्ध नहीं, क्योंकि उससे सम्बद्ध यही बात है कि तुम उनसे बचो, जिस प्रकार वे तुमसे बचते है। और अल्लाह तुम्हें अपने आपसे डराता है, और अल्लाह ही की ओर लौटना है
وَلَا تَطْرُدِ الَّذ۪ينَ يَدْعُونَ رَبَّهُمْ بِالْغَدٰوةِ وَالْعَشِيِّ يُر۪يدُونَ وَجْهَهُۜ مَا عَلَيْكَ مِنْ حِسَابِهِمْ مِنْ شَيْءٍ وَمَا مِنْ حِسَابِكَ عَلَيْهِمْ مِنْ شَيْءٍ فَتَطْرُدَهُمْ فَتَكُونَ مِنَ الظَّالِم۪ينَ
और जो लोग अपने रब को उसकी ख़ुशी की चाह में प्रातः और सायंकाल पुकारते रहते है, ऐसे लोगों को दूर न करना। उनके हिसाब की तुमपर कुछ भी ज़िम्मेदारी नहीं है और न तुम्हारे हिसाब की उनपर कोई ज़िम्मेदारी है कि तुम उन्हें दूर करो और फिर हो जाओ अत्याचारियों में से
وَذَرِ الَّذ۪ينَ اتَّخَذُوا د۪ينَهُمْ لَعِبًا وَلَهْوًا وَغَرَّتْهُمُ الْحَيٰوةُ الدُّنْيَا وَذَكِّرْ بِه۪ٓ اَنْ تُبْسَلَ نَفْسٌ بِمَا كَسَبَتْۗ لَيْسَ لَهَا مِنْ دُونِ اللّٰهِ وَلِيٌّ وَلَا شَف۪يعٌۚ وَاِنْ تَعْدِلْ كُلَّ عَدْلٍ لَا يُؤْخَذْ مِنْهَاۜ اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ اُبْسِلُوا بِمَا كَسَبُواۚ لَهُمْ شَرَابٌ مِنْ حَم۪يمٍ وَعَذَابٌ اَل۪يمٌ بِمَا كَانُوا يَكْفُرُونَ۟
छोड़ो उन लोगों को, जिन्होंने अपने धर्म को खेल और तमाशा बना लिया है और उन्हें सांसारिक जीवन ने धोखे में डाल रखा है। और इसके द्वारा उन्हें नसीहत करते रहो कि कहीं ऐसा न हो कि कोई अपनी कमाई के कारण तबाही में पड़ जाए। अल्लाह से हटकर कोई भी नहीं, जो उसका समर्थक और सिफ़ारिश करनेवाला हो सके और यदि वह छुटकारा पाने के लिए बदले के रूप में हर सम्भव चीज़ देने लगे, तो भी वह उससे न लिया जाए। ऐसे ही लोग है, जो अपनी कमाई के कारण तबाही में पड गए। उनके लिए पीने को खौलता हुआ पानी है और दुखद यातना भी; क्योंकि वे इनकार करते रहे थे
وَلَا تَسُبُّوا الَّذ۪ينَ يَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ فَيَسُبُّوا اللّٰهَ عَدْوًا بِغَيْرِ عِلْمٍۜ كَذٰلِكَ زَيَّنَّا لِكُلِّ اُمَّةٍ عَمَلَهُمْ ثُمَّ اِلٰى رَبِّهِمْ مَرْجِعُهُمْ فَيُنَبِّئُهُمْ بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
अल्लाह के सिवा जिन्हें ये पुकारते है, तुम उनके प्रति अपशब्द का प्रयोग न करो। ऐसा न हो कि वे हद से आगे बढ़कर अज्ञान वश अल्लाह के प्रति अपशब्द का प्रयोग करने लगें। इसी प्रकार हमने हर गिरोह के लिए उसके कर्म को सुहावना बना दिया है। फिर उन्हें अपने रब की ही ओर लौटना है। उस समय वह उन्हें बता देगा. जो कुछ वे करते रहे होंगे