आदेश और निषेध

98 आयतें, 4/4 पृष्ठ
وَمَا اخْتَلَفْتُمْ ف۪يهِ مِنْ شَيْءٍ فَحُكْمُهُٓ اِلَى اللّٰهِۜ ذٰلِكُمُ اللّٰهُ رَبّ۪ي عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُۗ وَاِلَيْهِ اُن۪يبُ
(रसूल ने कहा,) "जिस चीज़ में तुमने विभेद किया है उसका फ़ैसला तो अल्लाह के हवाले है। वही अल्लाह मेरा रब है। उसी पर मैंने भरोसा किया है, और उसी की ओर में रुजू करता हूँ
شَرَعَ لَكُمْ مِنَ الدّ۪ينِ مَا وَصّٰى بِه۪ نُوحًا وَالَّذ۪ٓي اَوْحَيْنَٓا اِلَيْكَ وَمَا وَصَّيْنَا بِه۪ٓ اِبْرٰه۪يمَ وَمُوسٰى وَع۪يسٰٓى اَنْ اَق۪يمُوا الدّ۪ينَ وَلَا تَتَفَرَّقُوا ف۪يهِۜ كَبُرَ عَلَى الْمُشْرِك۪ينَ مَا تَدْعُوهُمْ اِلَيْهِۜ اَللّٰهُ يَجْتَب۪ٓي اِلَيْهِ مَنْ يَشَٓاءُ وَيَهْد۪ٓي اِلَيْهِ مَنْ يُن۪يبُ
उसने तुम्हारे लिए वही धर्म निर्धारित किया जिसकी ताकीद उसने नूह को की थी।" और वह (जीवन्त आदेश) जिसकी प्रकाशना हमने तुम्हारी ओर की है और वह जिसकी ताकीद हमने इबराहीम और मूसा और ईसा को की थी यह है कि "धर्म को क़ायम करो और उसके विषय में अलग-अलग न हो जाओ।" बहुदेववादियों को वह चीज़ बहुत अप्रिय है, जिसकी ओर तुम उन्हें बुलाते हो। अल्लाह जिसे चाहता है अपनी ओर छाँट लेता है और अपनी ओर का मार्ग उसी को दिखाता है जो उसकी ओर रुजू करता है
فَلِذٰلِكَ فَادْعُۚ وَاسْتَقِمْ كَمَٓا اُمِرْتَۚ وَلَا تَتَّبِعْ اَهْوَٓاءَهُمْۚ وَقُلْ اٰمَنْتُ بِمَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ مِنْ كِتَابٍۚ وَاُمِرْتُ لِاَعْدِلَ بَيْنَكُمْۜ اَللّٰهُ رَبُّنَا وَرَبُّكُمْۜ لَنَٓا اَعْمَالُنَا وَلَكُمْ اَعْمَالُكُمْۜ لَا حُجَّةَ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْۜ اَللّٰهُ يَجْمَعُ بَيْنَنَاۚ وَاِلَيْهِ الْمَص۪يرُۜ
अतः इसी लिए (उन्हें सत्य की ओर) बुलाओ, और जैसा कि तुम्हें हुक्म दिया गया है स्वयं क़ायम रहो, और उनकी इच्छाओं का पालन न करना और कह दो, "अल्लाह ने जो किताब अवतरित की है, मैं उसपर ईमान लाया। मुझे तो आदेश हुआ है कि मैं तुम्हारे बीच न्याय करूँ। अल्लाह ही हमारा भी रब है और तुम्हारा भी। हमारे लिए हमारे कर्म है और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म। हममें और तुममें कोई झगड़ा नहीं। अल्लाह हम सबको इकट्ठा करेगा और अन्ततः उसी की ओर जाना है।"
ذٰلِكَ الَّذ۪ي يُبَشِّرُ اللّٰهُ عِبَادَهُ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِۜ قُلْ لَٓا اَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ اَجْرًا اِلَّا الْمَوَدَّةَ فِي الْقُرْبٰىۜ وَمَنْ يَقْتَرِفْ حَسَنَةً نَزِدْ لَهُ ف۪يهَا حُسْنًاۜ اِنَّ اللّٰهَ غَفُورٌ شَكُورٌ
उसी की शुभ सूचना अल्लाह अपने बन्दों को देता है जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए। कहो, "मैं इसका तुमसे कोई पारिश्रमिक नहीं माँगता, बस निकटता का प्रेम-भाव चाहता हूँ, जो कोई नेकी कमाएगा हम उसके लिए उसमें अच्छाई की अभिवृद्धि करेंगे। निश्चय ही अल्लाह अत्यन्त क्षमाशील, गुणग्राहक है।"
فَاَعْرِضْ عَنْ مَنْ تَوَلّٰى عَنْ ذِكْرِنَا وَلَمْ يُرِدْ اِلَّا الْحَيٰوةَ الدُّنْيَاۜ
अतः तुम उसको ध्यान में न लाओ जो हमारे ज़िक्र से मुँह मोड़ता है और सांसारिक जीवन के सिवा उसने कुछ नहीं चाहा
اَلَّذ۪ينَ يَجْتَنِبُونَ كَبَٓائِرَ الْاِثْمِ وَالْفَوَاحِشَ اِلَّا اللَّمَمَۜ اِنَّ رَبَّكَ وَاسِعُ الْمَغْفِرَةِۜ هُوَ اَعْلَمُ بِكُمْ اِذْ اَنْشَاَكُمْ مِنَ الْاَرْضِ وَاِذْ اَنْتُمْ اَجِنَّةٌ ف۪ي بُطُونِ اُمَّهَاتِكُمْۚ فَلَا تُزَكُّٓوا اَنْفُسَكُمْۜ هُوَ اَعْلَمُ بِمَنِ اتَّقٰى۟
वे लोग जो बड़े गुनाहों और अश्लील कर्मों से बचते है, यह और बात है कि संयोगबश कोई छोटी बुराई उनसे हो जाए। निश्चय ही तुम्हारा रब क्षमाशीलता मे बड़ा व्यापक है। वह तुम्हें उस समय से भली-भाँति जानता है, जबकि उसने तुम्हें धरती से पैदा किया और जबकि तुम अपनी माँओ के पेटों में भ्रुण अवस्था में थे। अतः अपने मन की पवित्रता और निखार का दावा न करो। वह उस व्यक्ति को भली-भाँति जानता है, जिसने डर रखा
فَلَا تُطِعِ الْمُكَذِّب۪ينَ
अतः तुम झुठलानेवालों को कहना न मानना
فَاصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تَكُنْ كَصَاحِبِ الْحُوتِۢ اِذْ نَادٰى وَهُوَ مَكْظُومٌۜ
तो अपने रब के आदेश हेतु धैर्य से काम लो और मछलीवाले (यूनुस अलै॰) की तरह न हो जाना, जबकि उसने पुकारा था इस दशा में कि वह ग़म में घुट रहा था।
وَاَنَّ الْمَسَاجِدَ لِلّٰهِ فَلَا تَدْعُوا مَعَ اللّٰهِ اَحَدًاۙ
और यह कि मस्जिदें अल्लाह के लिए है। अतः अल्लाह के साथ किसी और को न पुकारो
رَبُّ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَ فَاتَّخِذْهُ وَك۪يلًا
वह पूर्व और पश्चिम का रब है, उसके सिवा कोई इष्ट-पूज्य नहीं, अतः तुम उसी को अपना कार्यसाधक बना लो
اِنَّ رَبَّكَ يَعْلَمُ اَنَّكَ تَقُومُ اَدْنٰى مِنْ ثُلُثَيِ الَّيْلِ وَنِصْفَهُ وَثُلُثَهُ وَطَٓائِفَةٌ مِنَ الَّذ۪ينَ مَعَكَۜ وَاللّٰهُ يُقَدِّرُ الَّيْلَ وَالنَّهَارَۜ عَلِمَ اَنْ لَنْ تُحْصُوهُ فَتَابَ عَلَيْكُمْ فَاقْرَؤُ۫ا مَا تَيَسَّرَ مِنَ الْقُرْاٰنِۜ عَلِمَ اَنْ سَيَكُونُ مِنْكُمْ مَرْضٰىۙ وَاٰخَرُونَ يَضْرِبُونَ فِي الْاَرْضِ يَبْتَغُونَ مِنْ فَضْلِ اللّٰهِۙ وَاٰخَرُونَ يُقَاتِلُونَ ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِۘ فَاقْرَؤُ۫ا مَا تَيَسَّرَ مِنْهُۙ وَاَق۪يمُوا الصَّلٰوةَ وَاٰتُوا الزَّكٰوةَ وَاَقْرِضُوا اللّٰهَ قَرْضًا حَسَنًاۜ وَمَا تُقَدِّمُوا لِاَنْفُسِكُمْ مِنْ خَيْرٍ تَجِدُوهُ عِنْدَ اللّٰهِ هُوَ خَيْرًا وَاَعْظَمَ اَجْرًاۜ وَاسْتَغْفِرُوا اللّٰهَۜ اِنَّ اللّٰهَ غَفُورٌ رَح۪يمٌ
निस्संदेह तुम्हारा रब जानता है कि तुम लगभग दो तिहाई रात, आधी रात और एक तिहाई रात तक (नमाज़ में) खड़े रहते हो, और एक गिरोंह उन लोगों में से भी जो तुम्हारे साथ है, खड़ा होता है। और अल्लाह रात और दिन की घट-बढ़ नियत करता है। उसे मालूम है कि तुम सब उसका निर्वाह न कर सकोगे, अतः उसने तुमपर दया-दृष्टि की। अब जितना क़ुरआन आसानी से हो सके पढ़ लिया करो। उसे मालूम है कि तुममे से कुछ बीमार भी होंगे, और कुछ दूसरे लोग अल्लाह के उदार अनुग्रह (रोज़ी) को ढूँढ़ते हुए धरती में यात्रा करेंगे, कुछ दूसरे लोग अल्लाह के मार्ग में युद्ध करेंगे। अतः उसमें से जितना आसानी से हो सके पढ़ लिया करो, और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात देते रहो, और अल्लाह को ऋण दो, अच्छा ऋण। तुम जो भलाई भी अपने लिए (आगे) भेजोगे उसे अल्लाह के यहाँ अत्युत्तम और प्रतिदान की दृष्टि से बहुत बढ़कर पाओगे। और अल्लाह से माफ़ी माँगते रहो। बेशक अल्लाह अत्यन्त क्षमाशील, दयावान है
قُمْ فَاَنْذِرْۙ
उठो, और सावधान करने में लग जाओ
وَرَبَّكَ فَكَبِّرْۙ
और अपने रब की बड़ाई ही करो
وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْۙ
अपने दामन को पाक रखो
وَالرُّجْزَ فَاهْجُرْۙ
और गन्दगी से दूर ही रहो
سَبِّحِ اسْمَ رَبِّكَ الْاَعْلٰىۙ
तसबीह करो, अपने सर्वाच्च रब के नाम की,
فَذَكِّرْ اِنْ نَفَعَتِ الذِّكْرٰىۜ
अतः नसीहत करो, यदि नसीहत लाभप्रद हो!
فَاَمَّا الْيَت۪يمَ فَلَا تَقْهَرْۜ
अतः जो अनाथ हो उसे मत दबाना,
وَاَمَّا السَّٓائِلَ فَلَا تَنْهَرْۜ
और जो माँगता हो उसे न झिझकना,
وَاَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ
और जो तुम्हें रब की अनुकम्पा है, उसे बयान करते रहो
فَاِذَا فَرَغْتَ فَانْصَبْۙ
अतः जब निवृत हो तो परिश्रम में लग जाओ,
اِقْرَاْ بِاسْمِ رَبِّكَ الَّذ۪ي خَلَقَۚ
पढ़ो, अपने रब के नाम के साथ जिसने पैदा किया,
كَلَّاۜ لَا تُطِعْهُ وَاسْجُدْ وَاقْتَرِبْ
कदापि नहीं, उसकी बात न मानो और सजदे करते और क़रीब होते रहो