3. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
2 · अल-बक़रा
اِنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا سَوَٓاءٌ عَلَيْهِمْ ءَاَنْذَرْتَهُمْ اَمْ لَمْ تُنْذِرْهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ6
जिन लोगों ने कुफ़्र (इनकार) किया उनके लिए बराबर हैं, चाहे तुमने उन्हें सचेत किया हो या सचेत न किया हो, वे ईमान नहीं लाएँगे
خَتَمَ اللّٰهُ عَلٰى قُلُوبِهِمْ وَعَلٰى سَمْعِهِمْۜ وَعَلٰٓى اَبْصَارِهِمْ غِشَاوَةٌۘ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظ۪يمٌ۟7
अल्लाह ने उनके दिलों पर और कानों पर मुहर लगा दी है और उनकी आँखों पर परदा पड़ा है, और उनके लिए बड़ी यातना है
وَمِنَ النَّاسِ مَنْ يَقُولُ اٰمَنَّا بِاللّٰهِ وَبِالْيَوْمِ الْاٰخِرِ وَمَا هُمْ بِمُؤْمِن۪ينَۢ8
कुछ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि हम अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान रखते हैं, हालाँकि वे ईमान नहीं रखते
يُخَادِعُونَ اللّٰهَ وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُواۚ وَمَا يَخْدَعُونَ اِلَّٓا اَنْفُسَهُمْ وَمَا يَشْعُرُونَۜ9
वे अल्लाह और ईमानवालों के साथ धोखेबाज़ी कर रहे हैं, हालाँकि धोखा वे स्वयं अपने-आपको ही दे रहे हैं, परन्तु वे इसको महसूस नहीं करते
ف۪ي قُلُوبِهِمْ مَرَضٌۙ فَزَادَهُمُ اللّٰهُ مَرَضًاۚ وَلَهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌۙ بِمَا كَانُوا يَكْذِبُونَ10
उनके दिलों में रोग था तो अल्लाह ने उनके रोग को और बढ़ा दिया और उनके लिए झूठ बोलते रहने के कारण उनके लिए एक दुखद यातना है
وَاِذَا ق۪يلَ لَهُمْ لَا تُفْسِدُوا فِي الْاَرْضِۙ قَالُٓوا اِنَّمَا نَحْنُ مُصْلِحُونَ11
और जब उनसे कहा जाता है कि "ज़मीन में बिगाड़ पैदा न करो", तो कहते हैं, "हम तो केवल सुधारक है।""
اَلَٓا اِنَّهُمْ هُمُ الْمُفْسِدُونَ وَلٰكِنْ لَا يَشْعُرُونَ12
जान लो! वही हैं जो बिगाड़ पैदा करते हैं, परन्तु उन्हें एहसास नहीं होता
وَاِذَا ق۪يلَ لَهُمْ اٰمِنُوا كَمَٓا اٰمَنَ النَّاسُ قَالُٓوا اَنُؤْمِنُ كَمَٓا اٰمَنَ السُّفَهَٓاءُۜ اَلَٓا اِنَّهُمْ هُمُ السُّفَهَٓاءُ وَلٰكِنْ لَا يَعْلَمُونَ13
और जब उनसे कहा जाता है, "ईमान लाओ जैसे लोग ईमान लाए हैं", कहते हैं, "क्या हम ईमान लाए जैसे कम समझ लोग ईमान लाए हैं?" जान लो, वही कम समझ हैं परन्तु जानते नहीं
وَاِذَا لَقُوا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا قَالُٓوا اٰمَنَّاۚ وَاِذَا خَلَوْا اِلٰى شَيَاط۪ينِهِمْۙ قَالُٓوا اِنَّا مَعَكُمْۙ اِنَّمَا نَحْنُ مُسْتَهْزِؤُ۫نَ14
और जब ईमान लानेवालों से मिलते हैं तो कहते, "हम भी ईमान लाए हैं," और जब एकान्त में अपने शैतानों के पास पहुँचते हैं, तो कहते हैं, "हम तो तुम्हारे साथ हैं और यह तो हम केवल परिहास कर रहे हैं।"
اَللّٰهُ يَسْتَهْزِئُ بِهِمْ وَيَمُدُّهُمْ ف۪ي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ15
अल्लाह उनके साथ परिहास कर रहा है और उन्हें उनकी सरकशी में ढील दिए जाता है, वे भटकते फिर रहे हैं
اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ اشْتَرَوُا الضَّلَالَةَ بِالْهُدٰىۖ فَمَا رَبِحَتْ تِجَارَتُهُمْ وَمَا كَانُوا مُهْتَد۪ينَ16
यही वे लोग हैं, जिन्होंने मार्गदर्शन के बदले में गुमराही मोल ली, किन्तु उनके इस व्यापार में न कोई लाभ पहुँचाया, और न ही वे सीधा मार्ग पा सके